कुछ ऐसा कर चलों कि जमाना मिसाल दें…

बिल्थरावासियों के हर दर्द के हमसफर बने दिनेश ,  दूरदर्शिता व जनसेवा ने बनाया सफल राजनेता ,  जलते रहे दुश्मन और बढ़ता गया राजनीतिक कद ,

विजय बक्सरी

बिल्थरारोड (बलिया) ।  कहते है जो व्यक्ति जैसा सोचता है, उसका व्यवहार वैसा ही हो जाता है। क्षेत्र के चतुर्दिक विकास के लिए स्वयं का पूर्ण समर्पण, गरीबों की सेवा और शरण में आएं हर इंसान को भरपूर मदद करने की भावना ने दिनेश कुमार गुप्ता को क्षेत्र के हर मर्ज की दवा बन गए। जी हां, बलिया जनपद के मद्धेशिया समाज के सामान्य परिवार में जन्में दिनेश कुमार गुप्ता अपने दूरदर्शी सोच और जनसेवा के अपने भावना के कारण अपने क्षेत्र के हर दर्द का हमसफर तो बने ही, हर जरुरतमंद के मर्ज की दवा भी हो गए है। जिसके कारण वे एक अच्छे इंसान के साथ ही सफल राजनेता बन गए। अपने उदार व शांत व्यवहार संग हर किसी के मदद के लिए पूरी ऊर्जा के साथ खड़ा होने की प्रवृति से उनके आसपास चहेतों की तादाद इतनी बढ़ गई कि दुश्मन सिर्फ जलते रह गए और दिनेश गुप्ता का राजनीतिक कद ऐसा बढ़ा कि बलिया जनपद के आखिरी छोर पर स्थित बिल्थरारोड नगरपंचायत के दुरुह राजनीतिक चक्रव्युह को ऐसा भेदा कि वे लगातार दूसरी बार सबसे लोकप्रिय चेयरमैन बन गए। अतिपिछड़े बिल्थरारोड में उन्होंने रंगीन इंटरलाकिंग से गलियों की खुबसुरती तो बढ़ाई ही, वाराणसी के बाद माल्डिंग सड़क (रबड़ की सड़क) वाला एकलौता नगरपंचायत भी बना दिया। जिसके कारण बीजेपी सरकार में आदर्श नगरपंचायत बिल्थरारोड को विकास हेतु दीनदयाल उपाध्याय नगरपंचायत योजना के तहत चयन किया गया। नपं चेयरमैन के रुप में दिनेश गुप्ता ने साफ सफाई व्यवस्था को सुदृढ करने के साथ ही नगर को चकाचक सड़क की सौगात दी। साथ ही नगर के मुख्य सड़क के दोनों तरफ हाईमास्क टावर वाली लाइटे लगाई, जो शाम में जनरेटर से भी जगमगाने लगे। जिससे नगर की रौनक में चार चांद लग गया। नगर को सुलभ शौचालय के साथ ही पार्क व पुस्तकालय तक का निर्माण कराया। अपने कार्यकाल में बोर्ड के सम्मानित सभासदों के साथ ही अधिकारियों, कर्मचारियों से लगायत सफाईकर्मियों तक का मान बढ़ाया। नगरपंचायत की क्षमता को तो बतौर चेयरमैन ने इतना समृद्ध किया कि आसपास के जनपदों में बड़े आयोजनों में यहां के संसाधन की मांग की जाने लगी। उनकी कार्यकुशलता का डंका आसपास के जनपदों के साथ ही प्रदेश में भी ऐसा बजा कि नगर निकाय चेयरमैन संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष पद की कमान उन्हें सौंप दी गई। बढ़ते राजनीतिक व सामाजिक कद के कारण इंसान लोगों के दिल में अपना जगह बना लेता है या फिर लोगों के दिमाग में खटकने लगता है। दिनेश गुप्ता के साथ भी ऐसा ही है। चहेतों व समर्थकों के बने विशाल कुनबा के बीच विरोधियों की लिस्ट भी बढ़ती गई किंतु श्री गुप्त ने हर बार अपने विरोधियों को अपने सामथ्र्य व दूरदर्शिता का लोहा मनवाया। आये हो निभाने को जब, किरदार जमीं पर-कुछ ऐसा कर चलो कि जमाना मिसाल दें… को जीवन का मूल उद्देश्य बना चुके श्री गुप्त अपने मद्धेशिया समाज के उत्थान के लिए भी लगातार प्रयत्नशील रहते है। जिसके कारण समाज ने उन्हें अखिल भारतीय मद्धेशिया वैश्य सभा के राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी सोंपी और यूपी के प्रदेश कमेटी के संरक्षक बना दिए गए। निष्पक्ष कार्यशैली के कारण श्री गुप्त पर कभी भी अपने दायित्वों व जिम्मेदारियों को निभाने में जातिवाद का आरोप नहीं लगा है।

….खिड़कियां खोलता हूं तो जहरीली हवा आती है

– इन बंद कमरों में मेरी सांस घुटी जाती है-खिड़कियां खोलता हूं तो जहरीली हवा आती है… विख्यात लेखक कमलेश्वर की उक्त पंक्तियां नगरपंचायत चेयरमैन व वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश गुप्ता के मनोभाव पर सटीक बैठता है। जो सदैव स्वहीत व नकारात्मकता के साथ राजनीति में एकदूसरे का टांग खींचने वाले राजनेताओं से दूरी बनाकर रहते है। नकारात्मक भावना वाले नेता से सामना होने पर रास्ता बदल वे टकराव के बजाएं अपनी सारी ऊर्जा सिर्फ अपने लक्ष्य पर लगाते है किंतु क्षेत्र के सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा के लिए वे सदैव हर चट्टान का डटकर मुकाबला करते है।

व्यवसायी पुत्र से पहली बार बने नेता

– नगर के वरिष्ठ व्यवसायी जयचंद्र गुप्ता के तीन पुत्रों में सबसे छोटे पुत्र दिनेश गुप्ता में नेतृत्व क्षमता को बिल्थरावासियों ने पहली बार सन 2012 में सलाम किया तो दिनेश गुप्ता ने भी अपने कार्यकुशलता से लोगों के भरोसे को और मजबूत कर दिया। बतौर चेयरमैन बन 2012 से 2017 तक के कार्यकाल में श्री गुप्त ने नगरवासियों के दिल को ऐसा जीता कि अगले दिसंबर 2017 के चुनाव में जनता ने श्री गुप्त को एकतरफा जनमत देकर पूर्वाचल में सबसे अधिक मत से जीतने वाला चेयरमैन बना दिया। 2012 से पूर्व भी श्री गुप्त ने लोगों के समस्याओं के लिए क्षेत्र के दबंगों से लगातार भ्रष्टाचारी अधिकारी तक से सीधे लोहा लेते रहे है। जबकि 2007 से 2012 के तत्कालीन नपं चेयरमैन डा. हरिप्रकाश गुप्त के कार्यकाल में इनके परिवार से श्रीगुप्त की भाभी ने पहली बार अपने वार्ड सं. 12 से बतौर सभासद का चुनाव लड़ा और जीतकर अपने वार्ड में ऐतिहासिक बदलाव किया।

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