जीवन रक्षा के लिए दिन-रात दौड़ रही है 108 एंबुलेंस

कोरोना काल के एक माह में 1665 लोगों के लिए संजीवनी बनी एंबुलेंस,24 घंटे समर्पित भाव से कार्य कर रही हैं एंबुलेंस सेवा की 29 गाड़ियां

महराजगंज । कोविड-19 काल में महराजगंज की 108 एंबुलेंस की 29 गाड़ियाँ जीवन रक्षक पटरी पर दिन-रात दौड़ती हैं। कोरोना काल के एक माह में यह 108 एंबुलेंस सेवा 1665 लोगों के लिए संजीवनी बन कर सामने आईं हैं। एक माह( 20 जुलाई से 21 अगस्त तक) 108 एंबुलेंस सेवा से मिले लाभ को देखा जाए तो यह लिए वरदान साबित हुई है। कोरोना काल में जहाँ लोगों को प्राइवेट वाहन की सेवा लेने में काफी कठिनाई होती है, वहीं एक मोबाइल काल पर एंबुलेंस मरीज के दरवाजे पर खड़ी हो जाती है तथा मरीज को अस्पताल पहुँचा उसके जिंदगी को बचाने में मददगार साबित होती हैं।
कोरोना बचाव अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. आईए अंसारी ने बताया कि कोरोना काल में जहाँ अधिकांश लोग अपने-अपने घरों में रहने को मजबूर रहते हैं वहीं स्वास्थ्य विभाग की 108 एंबुलेंस की 29 गाड़ियाँ दिनरात संजीवनी बनकर सामने आई हैं। मार्च माह से ही कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन शुरू हो गया,स्वास्थ्य सेवाओं को छोड़ कर सब कुछ लॉकडाउन में बंद रहा, ऐसे में एंबुलेंसों ने ही बीमार मरीजों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में मददगार बनी। एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर नौमीनाथ ने बताया कि कोरोना काल में एंबुलेंस सेवा के पायलाट( चालक) एवं ईएमटी ( इमरजेन्सी मेडिकल टेक्नीशियन) कोरोना वारियर्स बन कर अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।

एक माह में कितने के लिए संजीवनी बनी 108 एंबुलेंस

-एक्सीडेंट के कुल—–116
-जहरखोरी के कुल——38
-जंतु एवं जानवरों के शिकार-26
-हृदय रोग के कुल———–49
-कोरोना उपचाराधीन—149
-प्रसव इमरजेन्सी के कुल–595
– अस्पताल से घर पहुंचाया–692

जोखिम भरी पटरी पर दौड़ती है सात एंबुलेंस

एंबुलेंस सेवा के प्रोग्राम मैनेजर ने बताया कि कोविड-19 की भयावह स्थिति को देखते हुए 108 एंबुलेंस की कुल 29 गाड़ियों में से सात एंबुलेंस कोविड उपचाराधीनों की सेवा में लगया गया है, जोखिम भरी पटरी ( कोविड मरीजों) पर दिनरात दौड़ती हैं। इन सात एंबुलेंसों के माध्यम से एक माह में कुल 144 कोरोना उपचाराधीनों को सेवा दी गयीं। इन एंबुलेंसों के पायलाट और ईएमटी सुरक्षा कवच के साथ मुस्तैद रहते हैं। इनको हमेशा पीपीई किट, ग्लब्स, मास्क एवं सेनेटाइजर से लैस रहना पड़ता है। प्रोग्राम मैनेजर नौमीनाथ ने बताया कि पीपीई किट सहित अन्य सामग्री के प्रयोग एवं निस्तारण को लेकर विशेष एहतियात बरतनी पड़ती हैं। इसके लिए चालकों एवं ईएमटी को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।

एंबुलेंस सेवा से बची जान

मार्ग दुर्घटना में घायल सदर ब्लाक के सतभरिया निवासीनी सुरसती व हाईटेंशन तार की चपेट में आए ग्राम पंचायत रम्हौली निवासी श्रीकांत यादव ने बताया कि घटना के बाद वह वे अचेतावस्था में आ गए थे मगर एंबुलेंस में आक्सीजन के सहारे अस्पताल पहुँचे जहां पर इलाज के बाद जान बची। घटना के दिन एंबुलेंस सेवा संजीवनी साबित हुई ।

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