टीबी और दिमागी बुखार के बच्चों का चिन्हांकन करें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता : – सीडीओ

जेई/एईएस के मामले में उच्च जोखिम वाले 50 गाँवों पर रहे विशेष फोकस, घर-घर करें सर्वे, सीडीपीओ और मुख्य सेविकाओं का किया गया अभिमुखीकरण

महराजगंज| जनपद की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वह अपने-अपने गांव में टीबी तथा जेई/ एईएस के से लक्षण वाले बच्चों को चिन्हित करें तथा जांच व उपचार के लिए सरकारी अस्पताल पर ले जाने के लिए प्रेरित करें। जेई/ एईएस के मामले में उच्च जोखिम वाले 50 गाँवों में विशेष फोकस होना चाहिए। इन गांवों में घर-घर सघन सर्वे होना चाहिए। उक्त बातें मुख्य विकास अधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने विकास भवन सभागार में बाल विकास परियोजना अधिकारियों ( सीडीपीओ)और मुख्य सेविकाओं के अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सभी सीडीपीओ अपने – अपने ब्लाॅक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उक्त बिन्दुओं पर सघन सर्वे के लिए निर्देशित करें तथा खुद पर्यवेक्षण करते रहें।

‘संभव-अभियान’ के तहत अति कुपोषित (सैम) और मध्यम कुपोषित (मैम) बच्चों की सेहत और सुपोषण के लिए सार्थक पहल की जाए । बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्रों से मिलने वाले सूखा राशन के विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर सेवन करने की सलाह दी जाए। समय-समय पर बच्चों का टीकाकरण भी कराया जाए। घर-घर सर्वे के दौरान सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कोरोना प्रोटोकॉल का विशेष ख्याल रखें। जिला क्षय रोग अधिकारी व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि सभी सीडीपीओ व मुख्य सेविकाएं अपने – अपने क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बताएं कि नया टीबी रोगी खोजने पर 500 रूपये प्रोत्साहन राशि मिलेगी । इसके साथ ही लाभार्थी को भी इलाज के दौरान निःक्षय पोषण योजना के तहत 500 रूपये प्रति माह की दर से पोषण भत्ता दिया जाएगा। यह धनराशि लाभार्थी के बैंक खाते में दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि दो सप्ताह से अधिक समय से खाँसी आना व खांसी के साथ बलगम आना, वजन कम होना,भूख न लगना, खाँसने पर बलगम के साथ कभी कभी खून आना, सीने में दर्द रहना टीबी के सामान्य लक्षण हैं, ऐसे बच्चों को चिन्हित कर टीबी की जांच अवश्य कराने के लिए प्रेरित एवं सहयोग करें। उन्होंने जन सामान्य से अपील की है कि यदि आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आपके घर जाएं तथा टीबी के बारे में जानकारी मांगे तो उससे कुछ छिपाएं नहीं बल्कि खुल कर बताएं ताकि बच्चों का सही समय पर समुचित इलाज हो सके।

अभिमुखीकरण कार्यशाला में बाल विकास परियोजना अधिकारी बृजेन्द्र जायसवाल, मनोज कुमार शुक्ला, विजय प्रकाश चौधरी, निरजा गुप्ता, सोनी तथा मुख्य सेविकाओं में सरोज राय, कमलावती, उर्मिला, इंदूमणि राय, मंजू तिवारी, सीमा दूबे, क्षमा त्रिपाठी, सुधा पांडेय, साधना पांडेय, सुनीता मणि त्रिपाठी, विनीता वर्मा, अर्चना शर्मा, शांति देवी, नूरी पांडेय, शांति सिंह, मीना देवी, शीला शुक्ला,आरती सिंह, माधुरी देवी, निर्मला सिंह ने प्रतिभाग किया।

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