मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला व बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना से मिली नई पहचान

महिलाओं व बालिकाओं का संबल बनीं योजनाएं, पति की मृत्यु के बाद निराश्रित महिला पेंशन योजना से लाखों महिलाओं तक पहुंचाई जा रही राहत , वन स्टाप सेंटर योजना व महिला हेल्पलाइन से हो रहा समस्याओं का समाधान ,बाल संरक्षण सेवाएं दे रहा बालक- बालिकाओं को सुरक्षा व संरक्षण .

कुशीनगर । सूबे की महिलाओं और बालिकाओं के सपनों को पंख देने का काम सरकार द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न योजनायें कर रहीं हैं। बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए जहाँ मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं चलायी जा रहीं हैं, वहीँ महिलाओं के लिए पति की मृत्यु के बाद निराश्रित महिला पेंशन और वन स्टाप सेंटर योजना चल रही हैं। इसके साथ ही किसी भी मुसीबत में घर बैठे हेल्पलाइन के जरिये तत्काल राहत पहुंचाने का भी काम चल रहा है। मिशन शक्ति अभियान के जरिये अब इन योजनाओं का प्रचार-प्रसार भी तेजी से हो रहा है, जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाएं और बालिकाएं इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना

सूबे में समान लिंगानुपात व कन्या भ्रूण हत्या को रोकने, बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा को सुदृढ़ करने, बालिका के परिवार को आर्थिक मदद और बालिका के प्रति आमजन की सोच में बदलाव लाने के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना मार्च 2019 में शुरू हुई। योजना का लाभ पाने के लिए उत्तर प्रदेश का निवासी होना चाहिए, परिवार में अधिकतम दो बच्चे हों और वार्षिक आय तीन लाख से कम हो । योजना के तहत बालिका के जन्म पर 2000 रूपये, एक साल का टीकाकरण पूर्ण होने पर 1000 रूपये, कक्षा-1 में प्रवेश के समय 2000 रूपये, कक्षा-6 में प्रवेश के समय 2000 रूपये, कक्षा-9 में प्रवेश के समय 3000 रूपये और 10वीं/12वीं परीक्षा उत्तीर्ण कर डिग्री या दो वर्षीय या अधिक डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने पर 5000 रूपये एकमुश्त सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं। अब तक लगभग पांच लाख बालिकाओं को इस योजना से लाभान्वित किया गया है।

181-महिला हेल्पलाइन तथा वन स्टॉप सेन्टर

महिलाओं, बालिकाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए टोल फ्री नम्बर- 181 जारी किया गया है। इस पर किसी भी वक्त मुसीबत में मदद ली जा सकती है। इसका केन्द्रीयकृत कॉल सेंटर लखनऊ में संचालित होता है। हेल्पलाइन पर मौजूद प्रशिक्षित परामर्शदाता समस्या के समाधान को हर वक्त मुस्तैद रहते हैं। वर्ष 2019-20 में 1.23 लाख महिलाओं को इसके जरिये मदद पहुंचाई गयी।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ तथा महिला शक्ति केन्द्र योजना :

गिरते लिंगानुपात में सुधार लाने, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बालिका के प्रति आमजन में सकारात्मक सोच लाने के लिए प्रदेश के 68 जिलों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ तथा महिला शक्ति केन्द्र योजना संचालित है। इसके तहत नाटकध्नुक्कड़, बैनर, पोस्टर, वाल राइटिंग, जनसभा, रेडियो जिंगल व अन्य प्रतियोगिताओं और समारोहों के माध्यम से जनमानस में जागरूकता फैलाई जा रही है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में जनपदों द्वारा उपलब्ध 17.32 करोड़ के सापेक्ष 9.79 करोड़ रूपये व्यय किये गए हैं। महिला शक्ति केन्द्रों योजना महिलाओं को अपने अधिकार प्राप्त करने, जागरूकता, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने हेतु सरकार से सम्पर्क करने के लिये इंटरफेस प्रदान करती हैं ।

रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष

महिलाओं व बालिकाओं के विरूद्ध होने वाले जघन्य अपराधों से पीड़ित महिलाओं के प्रति प्रदेश सरकार अत्यंत संवेदनशील है। कोष के अंर्तगत जघन्य अपराध से पीडित महिलाओं व बालिकाओं को 1 लाख से 10 लाख रूपये की आर्थिक क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है। सााि ही निशुल्क चिकित्सा सुविधा का भी प्रावधान किया गया है। योजना के अंर्तगत कुल 4937 महिलाओं तथा बालिकाओं को आर्थिक सहायता दी गई है।

मिशन शक्ति अभियान

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा ‘मिशन शक्ति’ के अंर्तगत 180 दिवसों की कार्ययोजना का शासनादेश समस्त जनपदों तथा संबंधित विभागों को प्रेषित किया गया है। विभाग द्वारा मुख्यालय स्तर से समस्त जनपदों को महिलाओं तथा बच्चों के प्रति हिंसा से रोकथाम, संबंधित कानूनों सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर ‘विषय सामग्री’ तैयार कर प्रेषित की गई है, साथ ही समस्त जनपदों को विभिन्न विषयों पर आडियो/वीडियो सन्देश, मूवी आदि प्रेषित की गई हैं। समस्त जनपद उक्त के माध्यम से ही प्रतिदिन गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं । विभाग अभी तक पाँच करोड लोगों को विभिन्न विषयों पर जागरूक कर चुका है। विभाग द्वारा विशेष रूप से महिलाओं तथा बच्चों के मानसिक व मनोसामाजिक स्वास्थ्य विषय पर निमहँस बेंगलुरु से टीम का प्रशिक्षण कराते हुए प्रदेश में जागरूकता लायी जा रही है ।

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