एनीमिया मुक्त भारत से ही साकार होगा स्वस्थ समाज का सपना: डॉ. राजेन्द्र

एनीमिया मुक्त भारत के लिए प्रशिक्षित किए गए मास्टर ट्रेनर्स

महराजगंज । एनीमिया मुक्त भारत अभियान के लिए सदर सीएचसी सभागार में बुधवार को मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया गया । प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के नोडल अधिकारी डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि एनीमिया की बढ़ती व्यापकता को देखते हुए एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरुआत की गई है। अगर हम एनीमिया की बात करें तो देखेंगे करीब 48 प्रतिशत आबादी एनिमिक है हैं। इस समस्या को देखते हुए हम सभी को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। प्रतिवर्ष तीन 3 प्रतिशत एनीमिया की व्यापकता दर को कम करने का हमारा लक्ष्य है। इसके लिए एनीमिया की पहचान, उसका उपचार और आवश्यकतानुसार सन्दर्भन कर उन्हें सुविधाएं प्रदान करनी होंगी। इसके लिए स्वास्थ्य , शिक्षा एवं बाल विकास विभाग के लोगों को आपसी समन्वय से काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि महिलाओं में गर्भावस्था से पहले ही अपर्याप्त खान-पान, आंतों में कृमि, माहवारी में अधिक रक्तस्राव तथा बार-बार गर्भधारण के कारण अधिकांशतः आयरन की कमी होती है। इससे एनीमिया की वजह से गर्भावस्था में मातृ मृत्यु, कम वजन के बच्चे पैदा होना, बच्चों के मस्तिष्क के विकास में कमी एवं नवजात की मृत्यु होना जैसे खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। ऐसे में एनीमिया मुक्त भारत के लिए सरकार व स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। इसके लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनीमिया एक स्वास्थ्य परिस्थिति है जिसमें लाल रक्त कणों की संख्या अथवा उनके आक्सीजन वहन करने की क्षमता शरीर की जैवक्रिया की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हो जाती है। जिसे पूरा करने के लिए लोगों को इलाज और खानपान सही रखने की जरूरत होती है |

उन्होंने कहा कि बच्चों, किशोरियों तथा महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए आयरन फोलिक एसिड के साथ पोषाहार का भी वितरण किया जाता है। इसके अलावा एनीमिया से बचाव के लिए किशोरियों, बच्चों तथा महिलाओं को हरी सब्जी, ताजे फल, दूध, पनीर, गुड़ , चना आदि के को सेवन करने के लिए जागरूक किया जाता है।  जिला कम्यूनिटी प्रोसेस मैनेजर संदीप पाठक ने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी मास्टर ट्रेनर्स अपने अपने ब्लाकों में जाकर अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें ताकि वह लोग एनीमिया से बचाव के लिए जन समुदाय को जागरूक कर सकें। प्रशिक्षण कार्यक्रम को डाॅ.एमक्यू लारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी बृजेन्द्र जायसवाल ने भी संबोधित किया। बतौर मास्टर ट्रेनर्स बाल विकास परियोजना अधिकारी विजय चौधरी, किरन जायसवाल, मंजू, चिकित्सकों में डाक्टर अग्रेज सिंह, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अंजनि सिंह, ब्लाक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर परमेश्वर शाही, बबीता, विनोद कुमार सिंह, शिक्षा विभाग के रूद्र प्रताप ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

एनीमिया के लक्षण

-पलक या निचली पलक के अंदर पीलापन।
-जीभ में सूजन
– होंठों के किनारों पर दरार
-चक्कर आना, थकान महसूस होना।
– सांसों का तेज चलना
– पैर में एंठन
– संक्रमण और लगातार बीमार पड़ना।

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