मनियर-ऐ जिंदगी थोड़ा सा वक्त दे…

मनियर , बलिया । तू पारकर द्वार देहरी, पैर के बंधन खोल आज ।फिजा में बिखरी कोई धून पे, संग हवा के डोल आज। सतरंगी के आसमा के रंगों में, रंग तू भी घोल आज। हटा के पर्दे होठों से, तू मन की बातें बोल आज। है पता मुझे लोग, तुझे आजादी के गीत न गाने देंगे। बात मेरे अतीत की कर, तुझको ताने देंगे। चुप तुझे करने की खातिर, लोग लाख बहाने देंगे। इन बातों को तू परवाह न कर, न आंधी तूफान से डर। सिर्फ जज्बात नहीं, इंकलाब तू लिख। संग आंगन के, आसमान भी तू लिख। जो दर्द सहे हैं चुप रहकर, उनके बचे निशान भी लिख। तू पार कर द्वार देहरी, पैर के बंधन खोल आज। फिजा में बिखरी कोई धून पे, संग हवा के डोल आज। अपने फेसबुक वॉल पर । For girls who wants to say something. नाम से शिर्षक की प्रेरणा देने वाली नगर पंचायत मनियर की अधिशासी अधिकारी मणि मंजरी राय अचानक फांसी के फंदे पर झूल कर जिंदगी की जंग हार गई। यह सुनकर हर कोई अचंभित एवं आश्चर्यचकित है। मणि मंजरी राय ने अपने फेसबुक वॉल पर मौत को रोकने के लिए भी लिखी थी- ऐ जिंदगी थोड़ा सा वक्त दे, थोड़ी सी रूक जा, जरा सांस लेने दे, जरा जख्मों को भरने दे, जरा आंसू छुपाने दे, अधूरे सपनों को भरने दे, पलकों पर नींद आने दे, जरा फिर से मुस्कुराने दे, ऐ जिंदगी थोड़ी सी रुक जा। थोड़ा सा वक्त दे। इस प्रकार के ईओ मणि मंजरी राय के लेख यह दर्शाता है कि गुलामी के पिंजड़े से वह हम मुक्त होना चाहती थी। कौन सी परिस्थिति बनी कि आत्महत्या करने पर विवश हुई। ऐसे लेख यह दर्शाता है कि वह मानसिक रूप से विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रही थी और लड़कर उन समस्याओं का समाधान करना चाहती थी। वह हमेशा शायद ऐसी समस्याओं को समाधान करने की कोशिश में थीऔर शायद कोई रास्ता न मिला हो तो वह आत्महत्या करने पर मजबूर हुई है। जांच के बाद ही आत्म हत्या के पीछे के रहस्य से पर्दा उठेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button