लोंगों में वीर रस का जज्बा और जुनून भरती रही देशभक्ति से ओतप्रोत कविताएं

चौरीचौरा शताब्दी समारोह पर कवि गोष्ठी का आयोजन ,कवि डॉ हरिओम पवार ने कहा, लाल किले के तीस कवि सम्मेलन पर चौरीचौरा का यह एक कार्यक्रम न्योछावर .

गोरखपुर । चौरीचौरा शताब्दी समारोह के पहले दिन मुख्य मंच पर कवि गोष्ठी के दौरान वीर रस की कविताओं ने लोगों की रगों में देशभक्ति का जुनून संचारित किया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति के कवि डॉ हरिओम पवार, डॉ कलीम कैसर, कवियित्री डॉ चेतना पाण्डेय, अर्चना मालवीय, आकृति विद्या अर्पण, वसीम मजहर, डॉ अंजना सिंह सेंगर और राजस्थान से आये कवि विनीत चौहान ने अपनी वीर रस की कविताओं से तालियां बटोरीं।

मशहूर कवि हरिओम पवार ने अपनी वीर रस की कविता ” मैं ताजों के लिए समर्थन गीत नहीं गाता, दरबारों के लिए अभिनन्दन गीत नहीं गाता, पुत्र मोह में शस्त्र त्याग द्रोण नहीं हो सकता, शब्दों की ज्वाला हूँ, जिस दिन मेरी आग बुझेगी, उसी दिन मैं मर जाऊंगा” पढ़कर खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने चौरीचौरी की धरती को नमन करते हुए कहा कि मैं लाल किले के तीस कवि सम्मेलन की जगह चौरीचौरा की इस धरती पर एक कवि सम्मेलन को न्योछावर करता हूँ। उन्होंने कहा कि जब-जब कविताएं सरकारों के समर्थन में लिखी गईं वो कविता ही मर गयी या सरकार गिर गई। अपनी कविता “जो सीने पर गोली खाने को आगे बढ़ जाते हैं, भारत माता की जय कहकर फांसी पर चढ़ जाते हैं’, उनके स्मारक भी चारो धाम दिखाई देते हैं”।

विनीत चौहान ने जब अपनी कविता से दिल्ली के किसान आंदोलन पर हमला बोलते हुए कहा “जब हमने वर्दी देकर सख्त बेड़ियां डाली हैं, भेड़ियों को खुली छूट दे डाली है।” कवयित्री चेतना पाण्डेय ने अपनी कविता “सुगम पंथ चुनेंगे हम तो कठिन पंथ पर चलेगा कौन…..’डगर है मुश्किल सम्भल के चलिए, छली है वक्त होशियारी से रहिये” को पढ़कर वाहवाही बटोरी। आकृति विद्या अर्पण ने अपनी कविता ” हर कृषक बने क्षत्रपति उस साधक को पूजे जन-मन, हरियाली का संयम हो तुलसी पूजे हर घर पर” पढ़ी खलील गोरखपुरी ने ” युगों युगों तक गूंजे नारा केवल एक दो सदी नहीं, भारत जैसा देश नहीं, गंगा जैसी नदी नहीं” पढ़कर तालियां बटोरी। अंजना सिंह ने जब अपनी कविता ” चौरीचौरा कांड शब्द से कांड हटाया जाएगा, आजादी के आंदोलन का मान बढ़ाया जाएगा, जनाक्रोश का प्रतिउत्तर कहिए, या आक्रोश हमारा था” पढ़ी तो पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।

अंजना सिंह ने चीन पर अपनी कविता “डोकलाम हो या गलवान की घाटी तुझे न देंगे हम, ज्यादा उछला तो तिब्बत पर कब्जा कर लेंगे हम, ऐ चीन तेरी छाती पर हम तिरंगा फहरा कर आएंगे” पढकर लोगों में जोश भरने का काम किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे राजेश राज ने अपनी कविता “पता है क्यों शहीदों को तिरंगे से ढका जाता है, मां सोते हुए बच्चे को आँचल डाल देती है” पढ़कर तालियां बटोरीं। इस दौरान मंच पर विधायक संगीता यादव, नगर पंचायत चेयरमैन सुनीता गुप्ता, ज्योतिप्रकाश गुप्ता सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

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