साहिल को मिली नयी जिंदगी, 163 बच्चों की सेहत में हुआ सुधार

पोषण पखवाड़े (16 मार्च से 31 मार्च तक) पर विशेष ,कोविड काल में बच्चों को पोषण बांट रहा है पोषण पुनर्वास केंद्र ,फेस मॉस्क, फिजिकल डिस्टेंसिंग और साफ-सफाई का रखा जाता है खासतौर से ध्यान .

गोरखपुर । गोरखनाथ के दस नंबर बोरिंग की रहने वाली गुलप्सा के पति राजगीर हैं। उनके आठ महीने के बेटे साहिल की फरवरी माह में तबीयत खराब हो गयी। कई चिकित्सकों को दिखाने के बाद वह बच्चे को जिला अस्पताल लेकर गयीं जहां चिकित्सकों ने बीआरडी मेडिकल कालेज रेफर कर दिया। मेडिकल कालेज के चिकित्सकों ने बच्चे को परिसर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) रेफर कर दिया। बीते माह 24 फरवरी को जब बच्चा भर्ती हुआ तो उसका वजन चार किलो नौ सौ ग्राम था और गर्दन तक टेढ़ी हो जाती थी। एनआरसी में देखभाल के बाद 16 मार्च को साहिल का वजन पांच किलो सात सौ ग्राम हो चुका है। अप्रैल 2020 से फरवरी 2021 तक साहिल जैसे 163 बच्चे एनआरसी से स्वस्थ होकर घर वापस लौट चुके हैं। केंद्र पर फेस मॉस्क, फिजिकल डिस्टेंसिंग और साफ-सफाई के नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए बच्चों को स्वस्थ जीवन की राह दिखाई जा रही है।

साहिल की मां गुलप्सा ने बताया कि उन्हें केंद्र में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। बच्चे के साथ उन्हें भी पौष्टिक भोजन निःशुल्क उपलब्ध करवाया गया। बच्चे को अंडा, फल, दाल जैसे पौष्टिक आहार के साथ निःशुल्क दवा दी गयी। चिकित्सक समय-समय पर आकर बच्चे का हालचाल लेते रहे। वह व्यवस्था से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि पिछले महीने बच्चे को उल्टी-दस्त की शिकायत थी जिसके कारण वह उसे अस्पताल लेकर गयी थीं। बच्चे की हालत इतनी खराब थी की गर्दन तक सीधी नहीं हो रही थी। एनआरसी में बच्चा जब इलाज के बाद स्वस्थ होने लगा तो उसे खेलने की भी सुविधा प्रदान की गयी। अब बच्चा ठीक होने लगा है।

एनआरसी की डायटिशियन पद्मिनी शुक्ला ने बताया कि बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अनिता मेहता की देखरेख में कोरोना प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करवाया जा रहा है। एक दूसरे से दो गज की दूरी रखी जाती है और सभी के लिए मॉस्क पहनना अनिवार्य है। एक दूसरे के बेड में भी पर्याप्त दूरी है। एक से ज्यादा अटेंडेंट को वार्ड में रहने की अनुमति नहीं है।

समर्पित भाव से कार्य कर रहा है स्टॉफ

बाबा राघव दास मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अनिता मेहता ने बताया कि फरवरी माह तक कुल 175 बच्चे एनआरसी में भर्ती हुए थे जिनमें से 163 स्वस्थ होकर डिस्चार्च हो चुके हैं। नोडल अधिकारी डॉ. विनीत जायसवाल की देखरेख में यहां की डॉयटिशियन पद्मिनी के अलावा स्टॉफ अनिता, माया, पूर्णिमा, नंदिनी, रेनू, प्रीती और कुक भगवान दास ने कोविड काल में समर्पित भाव से सेवाएं दी हैं।

एनआरसी सेंटर की सुविधाएं

• जनपद के बीआरडी मेडिकल कालेज में एनआरसी सेंटर है और यहां सभी सुविधाएं निशुल्क हैं।
• यहां बच्चों के इलाज के अलावा दोनों समय भोजन और एक केयर टेकर को भी निशुल्क भोजन मिलता है।
• भर्ती बच्चों को दोनों समय दूध और अंडा दिया जाता है।
• जो अभिभावक बच्चे के साथ रहते हैं उन्हें 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से उनके खाते में दिए जाते हैं।
• जो आंगनबाड़ी बच्चों को एनआरसी ले जाती हैं उन्हें सिर्फ एक बार 50 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
• केंद्र में भर्ती कराने से बच्चे को नया जीवन मिलता है। केंद्र में प्रशिक्षित चिकित्सक और स्टाफ नर्स बच्चों की देखभाल करती हैं।

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