उच्च जोखिम वाले 71 गाँवों में निरोधात्मक कार्यवाही पर विशेष जोर

जेई/ एईएस के मामले में चिन्हित चिह्नित हैं 71 ग्राम पंचायतें। साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, छिड़काव,जेई टीकाकरण से संतृप्त किए जा रहे उक्त गांव।

कुशीनगर । जेई-एईएस ( जापानी इंसेफ्लाइटिस, एक्यूट इंसेफ्लाइटिसि सिन्ड्रोम ) से बचाव के लिए वैसे तो पूरे जिले में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के तहत निरोधात्मक कार्यवाही एवं जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मगर इस मामले में उच्च जोखिम चिन्हित 71 गाँवों में दिमागी बुखार से बचाव के लिए विशेष तौर पर निरोधात्मक कार्यवाही एवं जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। चिन्हित गाँव में साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, छिड़काव के साथ विभिन्न बिन्दुओं पर संतृप्त करने की कार्यवाही भी तेज कर दी गयी है।

जिला मलेरिया अधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि जेई/ एईस के मामले में सभी चिन्हित गाँवों को विभिन्न बिन्दुओं पर संतृप्त कराना सरकार मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में है। ऐसे में उन सभी गांवों में साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराने, खराब पड़े इंडिया मार्का हैंड पंप को ठीक कराने, कीटनाशक का छिड़काव कराने, फागिंग कराने, जेई टीकाकरण से वंचित बच्चों का टीकाकरण कराने, गांव में ज्वर रोगियों की पहचान करने और सुअरबाड़ों को विसंक्रमित कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

जेई/ एईएस के मामले में चिह्नित उच्च जोखिम गांव

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि जेई/ एईएस के मामले में जो 71 गाँव चिह्नित हैं उसमें रामकोला ब्लाक के आठ, दुदही ब्लाक के छह, कसया ब्लाक के चार, फाजिलनगर के दो, तमकूही राज के पांच, तरयासुजान ब्लाक के एक, विशुनपुरा ब्लाक के सात, कुबेरस्थान के सत्तरह, कप्तानगंज ब्लाक के चार, खड्डा ब्लाक के छह, भोतिचक ब्लाक के दो, नेबुआ नौरंगिया ब्लाक के चार, सुकरौली ब्लाक के तीन तथा हाटा ब्लाक के दो ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

वर्ष वार जेई/एईएस का विवरण एक नजर में
वर्ष—कुल केस—-मृत्यु
2016–1029——161
2017–883——–126
2018—307 ——-37
2019—284——13
2020—298——17
2021—18———1

दिमागी बुखार के लक्षण

-पीड़ित को अचानक तेज बुखार आना।
-पीड़ित का तेज सिर दर्द होना।
-शरीर कांपना और लाल चकत्ते हो जाना।
– हाथ पैर में अकड़न हो जाना।
– उल्टी और बेहोशी होना।

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