कालाजार -तरयासुजान क्षेत्र के तीन गांवों में हो रहे छिडकाव अधिकारियों ने लिया जायजा, दिए जरूरी निर्देश

तीनों गाँव में 2520 घरों में तीन जून तक पूरा होगा छिड़काव, तीन टीम छिड़काव में जुटीं

कुशीनगर । कालाजार से बचाव के लिए तरयासुजान ब्लाक के तीन गांवों में चल रहे छिड़काव का अधिकारियों ने जायजा लिया और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। छिड़काव का जायजा लेने तरयासुजान क्षेत्र के भगवानपुर गाँव पहुँचे डिप्टी सीएमओ डाॅ. वीपी पांडेय, जिला मलेरिया अधिकारी आलोक कुमार, डब्ल्यूएचओ के जोनल को-आर्डिनेटर डॉ. सागर घोडेकर और पाथ के बलबीर ने छिड़काव में लगे श्रमिकों को घरों, गौशाला और शौचालयों में सघन छिड़काव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि छिड़काव छह फीट की ऊंचाई तक ठीक से होनी चाहिए।

जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) आलोक कुमार ने बताया कि कालाजार से प्रभावित तरयासुजान ब्लाक के 28 गाँवों में छिड़काव कराया जाना है । दो गांव में छिड़काव पूरा हो गया है जबकि जिन तीन गांवों में छिड़काव हो रहा है उनमें मिश्रौली खास, भगवानपुर तथा परसा मिश्र गांव के नाम शामिल हैं। यहाँ छिड़काव बीते 15 फरवरी से चल रहा है। इन तीनों गाँवों के कुल 2520 घरों में छिड़काव होगा। इससे करीब 12580 की आबादी सुरक्षित होगी। छिड़काव का काम तीन जून तक पूरा करा लिया जाएगा। डीएमओ ने कहा कि कालाजार उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा समय पर छिड़काव एवं अन्य निरोधात्मक कार्यवाही करायी जाती है। इसी क्रम में छिड़काव कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वेक्टर जनित रोग नियंत्रण के लिए अल्फ़ा साइपर मेथरीन 5% दवा का छिड़काव कराया जा रहा है । तरयासुजान के इन तीनों गाँवों में दवा छिड़काव के लिए तीन टीम लगायी गयी है। जिसमें 18 कर्मी लगाए गए हैं। अभियान में संबंधित क्षेत्र की आशा एवं एएनएम सहयोग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि कालाजार रोग बालू मक्खी के काटने से होता है। बालू मक्खी को जड़ से समाप्त करने के लिए ही दवा का छिड़काव किया जा रहा है। बालू मक्खी जमीन से छह फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती हैं। इसलिए छिड़काव घर के अंदर छह फीट तक कराया जाता है।

छिड़काव में सहयोग करें ग्रामीण-डीएमओ

जिला मलेरिया अधिकारी आलोक कुमार ने संबंधित गांव के लोगों से अपील की है किया कि छिड़काव ही कालाजार से बचाव के लिए बेहतर उपाय है। ऐसे में जब भी छिड़काव कर्मी छिड़काव के लिए गांव में जाय तो उनका सहयोग करें। ताकि लोगों के घरों में ठीक से छिड़काव हो सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में कालाजार के दो, वर्ष 2020 में 16 तथा वर्ष 2019 में 32 रोगी मिले थे।
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कालाजार को जानिए:

डब्ल्यूएचओ के जोनल कोर्डिनेटर डाॅ. सागर घोडेकर ने बताया कि कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह छह फीट ऊंचाई तक ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है। लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर काला पड़ जाता है।

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