विद्यार्थियों को अवसाद से उबारेगा ” मनोदर्पण”

कोविड-19 के मद्देनजर मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल ,हेल्पलाइन के माध्यम से विद्यार्थियों की हो सकेगी टेलीकाउंसिलिंग

महराजगंज। माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बहुत से बच्चे अवसाद के शिकार हो जाते हैं , उन्हें इससे उबारने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ने ‘मनोदर्पण’ नाम से पहल शुरू की है। यह ‘मनोदर्पण’ विद्यार्थियों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान कर अवसाद से उबारेगा, तथा उनकी मनोदशा ठीक करने में सहायक होगा। वहीं पर भारत सरकार द्वारा एक टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों की टेलीकाउंसिलिंग भी हो सकेगी।

डीआईओएस अशोक कुमार सिंह

इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ने विद्यार्थियों की टेली काउंसिलिंग के लिए जो टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इतना ही नहीं इसके अतिरिक्त केन्द्रीय संसाधन विकास मंत्रालय ने एक वेबपेज भी तैयार किया है। जिसका लिंक है https://mhrd.gov.in है।
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‘मनोदर्पण’ के संबंध में व्यापक व्याप्त प्रचार – प्रसार करें विद्यालय

जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी 244 माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं प्रबंधकों को निर्देशित किया है गया कि वह वे ‘ मनोदर्पण’ के संबंध में विद्यालय के छात्र-छात्राओं तथा अभिभावकों के बीच व्यापक प्रचार – प्रसार कराएं ताकि अवसाद की स्थिति में विद्यार्थी टेली काउंसिलिंग करा सकें ।

मनोचिकित्सक डाॅ धर्मेन्द्र कमला

संयुक्त जिला अस्पताल के मनो चिकित्सक डॉ. धर्मेन्द्र कमला का कहना है कि विद्याार्थियों में सबसे ज्यादा परेशानी स्ट्रेस डिसऑर्डर, एनेक्जाइटी डिस्आर्डर तथा डिप्रेशन की होती है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि मानसिक परेशानियों के लक्षण को पहचानें।
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क्या है मनोवैज्ञानिक स्थितियों के लक्षण :

-पढ़ाई में मन न लगना। रिजल्ट में गिरावट।
-शारीरिक व मानसिक विकास में देरी।
-नींद व आत्म विश्वास में कमी होना।
– मन उदास व घबराहट होना।
-भूख में कमी और अकेलापन महसूस होना।
-याददाश्त द्दाश्त में कमी और आत्म हत्या के विचार आना।
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मानसिक परेशानियों से निजात पाने के लिए क्या करें:

-नियमित दिनचर्या अपनाएं।
-समय समय पर भोजन व पूरी नींद लें।
– नियमित व्यायाम करें ।
-अपनी इच्छा के अनुरूप कुछ – कुछ काम करें ।
-परिवार के सभी सदस्यों से बात करें व अपनी भावनाओं को व्यरक्त करें ।
-जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय मदद के लिए किसी काउंसलर व मनोचिकित्सक से संपर्क करें।

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