युवाओं की आकांक्षाएं हों पूरी ताकि शिक्षा न रहे अधूरी

‘उदया’ ने यूपी और बिहार के 20,000 किशोर/किशोरियों पर किया सर्वे - सर्वे में किशोरावस्था से वयस्क होने के दौरान की प्रगति को किया ट्रैक .

महराजगंज। भारत 25.3 करोड़ आबादी के साथ दुनिया का सबसे अधिक किशोर आबादी (10-19 वर्ष की आयु ) वाला देश है । वर्तमान में प्रजनन दर में गिरावट के कारण जहाँ एक ओर कुल जनसँख्या में कामकाजी उम्र के युवाओं का प्रतिशत बढ़ रहा है वहीँ बच्चों का प्रतिशत कम हो रहा है । हालाँकि यह ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ इस युवा जनसँख्या को अपनी शिक्षा और कैरियर से जुड़ी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सही अवसरों में तत्काल निवेश पर निर्भर है ।

उदया ( किशोरों और युवा वयस्कों के जीवन को समझना ) अध्ययन के अनुसार शिक्षा से रोज़गार की ओर बढ़ते हुए युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के प्रयास से भारत को अपने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को पाने और सतत आर्थिक विकास करने में मदद मिल सकती है । यह अध्ययन पापुलेशन काउंसिल द्वारा उत्तर प्रदेश और बिहार में 10-19 वर्ष की आयु के लगभग 20,000 किशोर/ किशोरियों पर किया गया था ।

अध्ययन से पता चलता है कि लड़के 16 वर्ष की उम्र में (10वीं कक्षा के बाद) जबकि लड़कियां 14 वर्ष (8वीं कक्षा के बाद) और16-17 वर्ष (10वीं कक्षा) की उम्र में स्कूल या कॉलेज से ड्रॉपआउट हो रही हैं । केवल 40 प्रतिशत लड़के/ लड़कियों ने ही 20 वर्ष की उम्र में स्कूल या कॉलेज जाना जारी रखा । लड़कियों के लिए पढ़ाई छोड़ने के मुख्य कारण पढ़ाई में असफलता और पढ़ाई का खर्च झेलने में असमर्थता थी, जबकि लड़कों ने असफलता या नौकरी मिल जाने के कारण पढ़ाई छोड़ी।
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उद्योगों की मांग के अनुरूप दिए जा रहे प्रशिक्षण : कुणाल सिल्कू

कौशल विकास मिशन-उत्तर प्रदेश के मिशन निदेशक कुणाल सिल्कू का कहना है कि बेरोजगार युवक/युवतियों को मोटर वाहन, फैशन डिजाइनिंग समेत कई विधाओं में प्रशिक्षित किया जा रहा है । यह ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ रोजगार की अपार संभावनाएं हैं । ऐसे में बीच में पढाई छोड़कर घर बैठे युवाओं को चाहिए कि वह इस योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार के बेहतर अवसर हासिल करें । इसी उद्देश्य से उद्योगों की मांग के अनुरूप विभिन्न रोजगारपरक व्यावसायिक ट्रेड्स में प्रदेश के युवाओं को प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है । मिशन द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत 14 से 35 आयुवर्ग के साधारण शिक्षित युवा भी अपनी रूचि के अनुसार नि:शुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं । प्रशिक्षण के बाद इन युवाओं को रोजगार दिलाने का प्रयास भी प्रशिक्षण प्रदाताओं के माध्यम से मिशन द्वारा किया जाता है । इसलिए ऐसे सभी युवा जो किन्हीं कारणों से पारिवारिक व आर्थिक परिस्थितियों से अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं, इन कौशल प्रशिक्षण योजनाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी आजीविका कम सकते हैं ।
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आत्मनिर्भर बनाने पर जोर : रश्मि सोनकर

संयुक्त सचिव बोर्ड ऑफ़ टेक्नीकल एजूकेशन-उत्तर प्रदेश रश्मि सोनकर का कहना है कि युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के साथ ही खुद के व्यवसाय से जोड़ने के लिए विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षित करने का कार्य किया जा रहा है । इसके जरिये उनको आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही सशक्त भी बनाया जा रहा है । बेरोजगार युवक/युवतियां कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर अच्छी जगह पर नौकरी पा सकते हैं ।
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पाठ्यक्रम ऐसा ताकि बच्चे कमा सकें पैसा : डॉ. राखी सैनी

राजकीय पालीटेकनिक बाराबंकी की प्रधानाचार्य डॉ. राखी सैनी का कहना है कि आज के दौर में युवक/युवतियों को पढ़ाई के बाद बेरोजगार न रहना पड़े इसको ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम को ऐसा बनाया गया है कि यदि अच्छी जगह नौकरी न भी मिल पाए तो वह खुद का रोजगार शुरू कर वह आत्मनिर्भर बन सकें । इसीलिए पढ़ाई के दौरान प्रशिक्षण और शोध पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है ।

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