सरिता के संकल्प से बह रही सुपोषण और शिक्षा की बयार

32 बच्चों को बनाया सुपोषित, 11बालिकाओं को दिखाई स्कूल की राह । विभाग के लिए नजीर बनी सरिता, दो बार हो चुकीं हैं सम्मानित।

महराजगंज : अपने जज्बे और विभागीय योजनाओं को हथियार बनाकर सुपोषण लाने में जुटीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरिता के संकल्प से गांव में सुपोषण और शिक्षा की बयार बह रही है। इनके प्रयास से जहां दो साल में 32 बच्चे कुपोषण की से जंग में जीत लिए, वहीं स्कूल छोड़ चुकीं चुकी 11 बालिकाओं ने विद्यालय की राह पकड़ ली। उत्कृष्ट कार्यों की बदौलत सरिता विभाग में नजीर बन गयीं हैं । सरिता की इस उपलब्धि को देखते हुए प्रशासन ने उसे दो बार सम्मानित किया है। बीते 24 जनवरी को जिलाधिकारी डाॅ.उज्ज्वल कुमार ने उसे सम्मानित भी किया है। इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर वर्ष 2020 में भी सम्मानित किया गया था।

6 माह से 6 वर्ष के बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं सर्वांगीण विकास के लिए बच्चों का वजन एवं नियमित टीकाकरण कर उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जाती हैं है।
विभागीय योजनाओं के हथियार से फरेन्दा ब्लाक के ग्राम पंचायत सेमरहनी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरिता चौरसिया गांव में सुपोषण और शिक्षा की अलख जगा रही हैं। सरिता बताती हैं कि अप्रैल 2019 के की सर्वे से पता चला कि ग्राम पंचायत सेमरहनी व वनग्राम सूरपार में 19 बच्चे कुपोषित तथा 16 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में हैं,जबकि 11 बालिकाएं स्कूल छोड़ चुकी हैं।

इन बच्चों को सुपोषित करने के लिए समय-समय पर पोषाहार देकर नियमित फालोअप किया गया। नतीजा रहा कि करीब दो साल में गांव के 35 कुपोषित बच्चों में से 32 ने कुपोषण से जंग जीत ली। इसके लिए कुपोषित बच्चों के घरों पर सहजन का पौधा लगाकर इसके पत्ते, तना, फल की उपयोगिता भी बताई।

कुपोषण से जंग जीतने वाले 17 कुपोषित श्रेणी के बच्चों में नंदिनी, नीलम, वंदना, आराधना, रिया, सलोनी, मोहनी, सलोनी पुत्री बेचू, किशन, सनुज, रितेश, काजल, प्रिया, आलोक, बाबी, विपीन, नंदिनी तथा अतिकुपोषित श्रेणी के 15 बच्चों में सबिता, सलोनी, सुनीता, रोहित, आशीष, सूरज, विकास, नीतू, अनू, श्रद्धा, विशाल, सूर्य प्रताप, दीपा, कृष्णा के नाम हैं।

बकौल सरिता अब उनके क्षेत्र के सूरपार वनग्राम में मनीषा (30 माह) पुत्री रीना अति कुपोषित तथा दिव्या ( तीन साल) व सूर्यप्रताप( चार साल) जो पहले से कुपोषित रह गए हैं। अब इन तीनों को सुपोषित करने के लिए विभाग से मिलने वाले घी, सोयाबीन, दाल, व दूध दिया जा रहा है। साथ ही परिवारी जनों खानपान में सुधार लाने को कहा जा रहा है।

सेमरहनी गांव के दिनेश ने बताया कि उसके परिवार में जुड़वा बच्चे पैदा हुए जिसमें लड़का ठीक तथा लड़की अति कुपोषित पैदा हुई। जानकारी मिलने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरिता उनके घर आयीं तो स्तनपान कराने पर जोर दिया, नियमित वजन लेना शुरू कर दिया। समय-समय पर पोषाहार भी देना शुरू कर दिया। अस्पताल भी ले गयीं। इलाज हुआ तो बच्ची भी ठीक हो गयी।

उपरोक्त उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बाल विकास परियोजना अधिकारी फरेन्दा बृजेन्द्र जायसवाल ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरिता चौरसिया अपनी कार्य कुशलता की बदौलत विभाग में नजीर बन गयी हैं। उत्कृष्ट कार्य की बदौलत वह जिलाधिकारी डाॅ. उज्ज्वल कुमार के हाथों जनवरी 2021 में सम्मानित भी हो चुकी हैं। इससे पहले भी उसे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 2020 में भी सम्मानित किया गया था।

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