सात अक्टूबर तक घर-घर खिलाई जाएगी पेट के कीड़े मारने की दवा

आज से शुरू हुआ राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान ,करीब नौ लाख बच्चों को खिलाई जाएगी एल्बेण्डाजाल .

महराजगंज । जिले के बच्चों को कीड़े मारने की दवा खिलाने का अभियान आज से शुरू हो गया है। आशा, एएनएम और आगंनबाड़ी कार्यकर्ता घर–घर जाकर पेट के कीड़े मारने की दवा एल्बेण्डाजाल खिला रही हैं। यह अभियान 7 अक्टूबर तक चलेगा।कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग संयुक्त रूप से प्रयासरत हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आरबीएसके व आरकेएसके के नोडल राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत करीब नौ लाख बच्चों को दवा खिलाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि कोरोना काल के कारण आगंनबाड़ी केंद्र और स्कूल आदि बंद चल रहे हैं। इसलिए इस बार आशा और आगंनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से एक वर्ष से 19 तक बच्चों को एल्बेण्डाजाल की दवा घर-घर जाकर खिलाई जाएगी।  किसी भी अभिभावक को यह टेबलेट रखने या बाद में खिलाने के लिए नहीं देनी है। यह दवा आशा / आगंनवाड़ी के सामने ही बच्चों को खिलानी है।
नोडल अधिकारी ने बताया कि कोविड-19 के सक्रमंण के चलते सभी फ्रंट लाइन कार्यकर्ताओं को खास प्रोटोकाल का पालन करने के निर्देश दिये गए हैं। अभियान में लगे सभी स्वास्थ्य कर्मी मास्क के साथ शारीरिक दूरी का पालन करते हुये बच्चों को दवा खिलाएंगे। उन्होंने बताया कि ज्यादा छोटे बच्चों को टेबलेट चूरा कर पानी के साथ खिलाया जाएगा। बड़े बच्चों को भी दवा चबा चबाकर ही खानी है।

अभियान में लगे करीब छह हजार कर्मचारी

आरकेएसके के जनपदीय कंसल्टेंट शिवेन्द्र प्रताप श्रीवास्तव ने बताया कि कृमि मुक्ति अभियान में करीब 6000 कर्मचारी लगाए गए है। इनमें 243 एएनएम, 2511 आशा कार्यकर्ता तथा 3096 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। इनके अतिरिक्त कुछ सुपरवाइजर भी लगाए गए हैं।

बीमार बच्चे को न खिलाएं दवा

किसी भी तरह की बीमारी होने पर बच्चे को एल्बेण्डाजाल टेबलेट नहीं खिलानी है। यदि किसी भी तरह उल्टी या मिचली महसूस होती है तो खबराने की जरूरत नहीं। पेट में कीड़े ज्यादा होने पर दवा खाने के बाद सरदर्द , उल्टी, मिचली, थकान होना, या चक्कर आना महसूस होना एक सामान्य प्रक्रिया है। दवा खाने के थोड़ी देर बाद सब सही हो जाता है। इसके अलावा फिर भी किसी अन्य तरह की बड़ी परेशानी हो तो मुफ्त एंबुलेंस सेवा के टोलफ्री नंबर 108 से मदद ले सकते हैं।

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