मुर्गे खरीदने को लेकर हुई मारपीट में तीन घायल

चाकू से घायल युवक की हालत गम्भीर वाराणसी में चल रहा इलाज , संवेदनशील जगहों पर पुलिस तैनात

सिकन्दरपुर(बलिया) । बिल्थरारोड मार्ग पर कांशीराम आवास के समीप चिकेन की दूकान पर मोल भाव के दौरान खरीदार व दूकानदार में विवाद हो गया। इस दौरान दोनों पक्षों में बात इतनी बढ़ गई कि बिक्रेता और क्रेता में मारपीट होने लगी इसी दौरान विक्रेता ने चाकू से वार कर खरीदार सहित उसके साथी को गंभीर रुप से जख्मी कर दिया। जख्मी युवकों में से एक का इलाज वाराणसी के अस्पताल में चल रहा है
जानकारी के अनुसार धोबहा के कांशीराम आवास के समीप काफी समय से एक ब्यक्ति मुर्गा का मीट बेचने का धंधा करता है। शनिवार की शाम को सिकंदरपुर कस्बा निवासी दो युवक जितेन्द्र पाण्डेय(21)व भोला यादव (19)उक्त दूकान पर मीट खरीदने गए। उसी दौरान भाव को लेकर दूकानदार व दोनों युवकों में विवाद हो गया जो मार पीट में बदल गया। मार पीट के दौरान दूकानदार ने अचानक चाकू से दोनों पर हमला कर दिया। जिससे दोनो गंभीर रूप से घायल हो गए। तथा मिट बेच रहे मोनू कुरैशी उम्र 22 साल भी घायल हो गया । इस दौरान शोर सुनकर आसपास मौजूद लोग भी पहुंच गए और हमलावरों को पकड़ लिया। वहीं घायल युवकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकन्दरपुर पहुंचाया जहां प्राथमिक उपचार के बाद भोला यादव की हालत गंभीर देखते हुए चिकित्सको ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इस दौरान सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल सी एच सी पहुंच कर हमलावरों में से एक को हिरासत में लेकर छानबीन शुरू कर दिया है। इस सम्बन्ध में थानाध्यक्ष बालमुकुंद मिश्रा ने बताया कि घायल परिजनों की तहरीर पर तीन के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर सुसंगत धाराओं में कार्यवाही की जा रही है।

क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रही है अवैध मुर्गा मीट की दुकान

सिकंदरपुर। शनिवार के दिन शाम को मुर्गे की दुकान पर मोलभाव को लेकर उपजे विवाद में मारपीट में चाकूबाजी की घटना घटित हो गई, जिसमें विक्रेता के द्वारा क्रेता के ऊपर चाकू से हमला कर दिया गया, जिसमें दो गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में से एक की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिसे इलाज हेतु वाराणसी के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इस दौरान पूरे क्षेत्र में यदि देखा जाए तो बिना बिना लाइसेंस के 50 से अधिक मुर्गा की दुकानें चल रही है। यहां सवाल यह उठता है कि आखिर बिना लाइसेंस दुकानों को चलवा कौन रहा है। कस्बे के अंदर गिने-चुने लोगों को ही लाइसेंस प्रदान की गई है। बावजूद इसके क्षेत्र के अधिकतर चट्टी चौराहों पर मुर्गे की दुकान अवैध रूप से संचालित होती हैं। सड़को के किनारे बीमारी फैलाने का काम भी हो रहा है ।

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